ऊँट की समस्या

रचयिता ने मुस्काते हुए ऊँट को रेगिस्तान में रहने की समस्या थमाई। ऊँट भी कम न था उसने भी मुस्काते हुए बड़ी ही सहजता से रेगिस्तान में वास करने के लिए खुद को सक्षम कर लिया। पानी की कमी से जूझता , झुलसती रेत और कटीले पेड़ो से भरा दुर्गम अथाह मरुस्थल। ऊँट ने अपनी पीठ के कूबड़ में पानी के बूंदों को बड़े धैर्य से सहेजना सीख लिया। अब वो मीलों बिना पानी के चल सकता था। गर्म झुलसाने वाली हवा को उसने अपना प्रिय संगी बना लिया और अपनी ज़बान को सख्त कर कटीले पेड़ो में भी स्वाद ढूंढ लिया।

रचयिता ने इंसान भी बनाया। एक दिन इंसान रेगिस्तान के इस ऊँट का मालिक बन बैठा और उसे अपने साथ ले गया। जहाँ रेत तो थी पर रेतीली न थी। हवा झुलसाती न थी। मृगमरीचिकाओं से खूब परिचय था ऊँट का। अनाड़ीपन में कई बार वो उनके पीछे दूर तलक भागा था। दूर चमचमाता हुआ पानी का जज़ीरा। खूब समझ थी उसे अब इन छलावों की। पर यहाँ इस गीली रेत के साथ साथ हर पल एक मृगमरीचिका चलती थी। अथाह जल उफनता था। शांत शिथिल जगमगाता सा भ्रमित करने वाल जल नहीं। कभी कौंधता , कभी उफनता , कभी गरजता , कभी बढ़ता कभी घटता अथाह जलाशय था वो। उसकी समझ के परे। वो शायद भ्रम ही नहीं था। इसका अहसास तब हुआ जब वो उस पानी में अपने पाँव डालें और सहज ही उस जल को पीने लगा।

पर अगले ही पल ऐसा तेज़ खारापन की उसकी ज़बान सूख गयी। उफ़ अजब मृगमरीचिका थी वो । पानी के होते हुए भी प्यास न बूझ सकने वाली।

रचयिता की दी समस्या को तो ऊँट ने हँस के सुलझा ली थी । पर मालिक बन बैठे इस इंसान की दी हुई समस्या को वो अभी बूझ रहा था। घंटो गीली रेत पर बैठ उस अनंत समुद्र को मृगमरीचिका समझ निहारता वो ऊँट अभी भी स्तब्ध है। और रचयिता के रेगिस्तान को याद करके उदास भी।

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She … conflict with time..

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She is in conflict with time. She loves to waste it when she has plenty at her hand. She knows well that it will snap back at her hand like a broken over-stretched rubber band. She sometimes wishes that time was like the tape in old audio cassettes that she could rewind with a juggle of an ordinary HB pencil.

She used to think of her life in time labelled boxes ... tens, teens , twenties. She feels less need of boxes now as twenties box has some teens stuff and the stuff of the childhood spills everywhere. (There is some even in the new thirties box.)

She doesn’t want to be a time traveler. It would be too much to travel in time. Jet lags of advanced stage might kill her mental decorum. But she won’t mind if a time traveler comes to visit and shares stories of his exploits and thinks of her in special terms.

Her problem with time is that it passes away. It is not patient enough for her. It never stops to give her time to know herself. All it keeps doing is changing her, making her older and never fully equipped to finish things timely. Her plans spill over and get delayed. She abhors devicing time-tables . They make her look incompetent.

She loves the word timeless. This is why perhaps she prefers diamonds.Love as a feeling per se she feels may be timeless but when attached to people who are attached to time perhaps it becomes prone to change.

She keeps looking for something timeless within herself.

बंद आँखों के परे

वो थक कर आँखें मूँद लेट गयी। घना अन्धकार। पलकों के पट बंद होते ही जैसे रंग और आकार एक भ्रम मात्र रह जाते है। वो आँखों को जोर से भींचती है। हल्का सा दर्द महसूस होता है और उस घने काले अन्धकार में एक विस्मित सा हरा रंग कौंधता है। फिर अजब से चक्रवात उभरने लगते हैं। पीड़ा पर ध्यान नहीं है उसका। वो और जोर से आँखें भींचती है। अब उन चक्रवातों से उभरने लगते है कुछ चमकीले बिन्दु। वो थमती नहीं और आपने दांतों को भी भींच लेती है। वो बिन्दु लाल , हरे , नीले , पीले अननत ब्रह्माण्ड में चमकते अनगिन तारों से प्रतीत होने लगते हैं।

उन अबूझ चक्रवातों के परे वो बंद आँखों से जैसे आकाशगंगा में गोते खाने लगाती है। बंद आँखों में छुपे इस रहस्यमयी तारामंडल में वो लिप्त हो जाती है और धीरे धीरे थक कर चूर हुई आँखें आप ही सहज हो जाती है। फिर अवतरित होने लगते है स्वपन और खुलने लगता है बंद आँखों के परे का विस्मितकारी संसार।
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